Friday, 12 July 2013

कुछ तो कर .........


सिर्फ तुम्हारे लिए......

हम कबसे तेरे प्यार को तरसें, कुछ तो कर 
बूढ़े़ गमले बरसात को तरसें, कुछ तो कर

माना तेरा गैरों से रिस्ता ज्यादा अच्छा है,
अपने तेरे दीदार को तरसें, कुछ तो कर

बहुत हो चुकी छुपन छुपाई तेरे मेरे बीच,
बाहर निकल या कूकी मार, कुछ तो कर 

ज्यादा नहीं, बस तुझसे इक इश्क का ज़ुर्म है
सजा सुना या माफी दे, कुछ तो कर

ये अमावस की रात ना जाने कितनी लम्बी है,
तू छत पे आ या चांद बुला, कुछ तो कर.....
                                                            स्वरचित